Saturday, December 6, 2025

Utanaa nahi kiya

 जितना पागलपन हो सकता था उतना नही किया 

तुझसे प्यार किया बहुत पर उतना नही किया


हद में रह कर किया तो क्या प्यार प्यार नहीं होता 

कैसे बताएं के कितना किया और कितना नहीं किया


डर था, नादानी थी, मजबूरी भी थी मेरी,

घर लौट ही ना पाएं सफर उतना नहीं किया


मस्जिद गए, नमाज पढ़ी पर खतना नहीं किया 

तुझसे प्यार किया बहुत पर उतना नहीं किया

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