Thursday, August 27, 2026

Zamane se pehle

हमने रखा था तुमको ज़माने से पहले 

तुम भी सोच लेते आज़माने से पहले


बड़ी छटपटाहट में निकलते हैं दिन तेरे बिन

कोई इशारा कर दिया कर न आने के पहले 


चलो मैं भूल जाऊंगा तुमने क्या बोला था

एक बार सच बोल दो बहाने से पहले 


इसी गुमाँ ने कितनी जवानियाँ खराब कर दी

उसने आँख मिलायी तो थी आँख चुराने से पहले 


मेरा हश्र वही होगा जो हर परवाने का होता है 

अपनी सोच लो मुझको जलाने से पहले 


ये रूठने मनाने का खेल मुझे आता ही नहीं 

मैं तो मान जाता हूं तेरे मनाने से पहले 


ये तो अब है जो तुमको फ़ासिले चाहिए 

सोचना चाहिए था मुझमे समाने से पहले

Tuesday, August 25, 2026

Nishani

हम निशानी समझ के जो दे रहे थे

वो नादानी समझ के मिटा रहे थे


हटा के चश्मा नज़र से मेरी 

वो रंग अपने दिखा रहे थे 


वो पूछ रहे थे नाम हमारा 

हम उनको अपना बता रहे थे 


दफ़्न कर चुके थे वो एहसास सारे 

बस मरासिम को सूली चढ़ा रहे थे 


मैं उम्मीद पूरी कर रहा था उनकी 

वो वादा अपना निभा रहे थे


चिता पर भी वो खुली आंखों से लेटा 

कोई ख़्वाब उसको सता रहे थे

Saturday, August 22, 2026

Tareeqay

ख्वाब भी हमको सलीके से नहीं आते 

तरीके से देखता हूं पर तरीके से नहीं आते


घुसा है दिल में तसव्वुर नीमकश 

तीर भी आर-पार तरीके से नहीं आते


पुरानी तालीम है मेरी पुराने मेरे तौर

मुझे नए जमाने के तरीके से नहीं आते


मरासिम न हुए गणित के सवाल हो गये 

आते तो हैं समझ पर तरीके से नहीं आते


इश्क़ करूं या रश्क करूं उस सादगी से

बहाने बनाने भी उन्हें तरीके से नहीं आते 


मेरे पास आते ही उन्हें घड़ी से प्यार हो जाता है

आते तो हैं मिलने पर तरीके से नहीं आते

Kaise

 जिंदगी चढ़ा देती है जिसको अर्श पर 

वो टूटा हुआ तारा कैसे हो जाता है 


मैंने अपना लिये थे कुछ ग़म

ये ग़म इतना सारा कैसे हो जाता है 


पी के पानी मीठी नदियों का 

समंदर और भी खारा कैसे हो जाता है 


दे के आंसू, कर के रंजिश

सितमगर और भी प्यारा कैसे हो जाता है

Friday, August 21, 2026

Mat karna

मन में उबाल आये तो खुद से सवाल मत करना

उफन जाना, सुलग सुलग कर मलाल मत करना


तुम बादल हो, खुद तय करो कब करनी है बारिश

लोग तो यही कहेंगे कि फिलहाल मत करना


दोस्तों में भी उसे दुश्मन नज़र आने लगे 

किसी दुश्मन का भी ऐसा हाल मत करना


मैं गुनहगार हूं तुम्हारा, बेशक़ क़त्ल करो

मगर एक बार में करना, हलाल मत करना


बवाल वाइज़ों से होता है बावलों से नहीं

सिर्फ बवाल करने के लिए बवाल मत करना

Thursday, August 20, 2026

Qirdaar

न इधर उम्मीद-ए-वफ़ा है न उधर कोई प्यार में है,

खुश हैं ये अदाकार हीर-रांझे के क़िरदार में हैं


बुझा आया वो फुरकत के अंगारों को,

मय का क़तरा आज समंदर के क़िरदार में है 


सबपे भरोसा और सब पे शुबा रखता हूं,

कौन जाने कौन किसके किरदार में है


जाने कब से कश्ति मेरी मझधार में है,

नाखुदा जब से खुदा के किरदार में है


पानी दिखा के प्यासा रखते हैं दोनों 

सेहरा ओ समंदर दोनों एक ही क़िरदार में हैं


कभी कभी तो मुझे भी हाथों खिला देती है

मेरी शरीक-ए-हयात अभी माँ के किरदार में है


इस मिसरे पे पूरा नाम लुटा दो उज्ज्वल 

ये एक शेर पूरी ग़ज़ल के किरदार में है

Bas tere liye

तूफानों से भी अच्छे रिश्ते बनाए रक्खे हैं

लौ के लिए हाथों से फानूस बनाए रक्खे हैं


बस ये मत समझना ये मेरे लिए आसान है 

तेरे फूलों के लिए कुछ काँटे अपनाये रक्खे हैँ 


हर सख्ती के पीछे एक बंधा हुआ इंसान है 

संगदिल नहीं हूं दिल पे पत्थर जमाये रक्खे हैं


रोज़ जाग रहा हूं चंद जुगनुओं के लिए 

मेंरे बिस्तर पे तेरे सपने सुलाए रक्खे हैं 


बहुत सताता है मुझे खामोशी का शोर 

तेरी शिकायतो में अपने शिक़वे भुलाये रक्खे हैं


मैं आगे खड़ा हूं कुछ तीर लेने के लिए 

अपने जूतों में मैंने छाले छिपाये रक्खे हैं


तुम्हारे ख़ाबो की मुझे भी है परवाह 

बस जेब में आज के निवाले बचाये रक्खे हैं

Zamane se pehle

हमने रखा था तुमको ज़माने से पहले  तुम भी सोच लेते आज़माने से पहले बड़ी छटपटाहट में निकलते हैं दिन तेरे बिन कोई इशारा कर दिया कर न आने के पहले ...

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