Wednesday, September 16, 2026

Bayaan e ranaai

मुसलसल निगाहों से छलक रही है शराब 

ये जहां होश में आये तो आए कैसे 


वो कुछ कहते भी नहीं और सुनते भी नहीं

उनके मतलब की बात उनको बताएं कैसे 


उनकी ज़ुल्फ़ लगती है बहते पानी की तरह 

सराब दिखता है पर सराब मिल जाये कैसे 


सुर्ख लब आखिरी शम्मा हो किसी महफ़िल की 

तरसते को और तरसता कर आये कैसे 


सादा दिल रखता है गुलाबी तेरे आरिज़ को 

उनपे कोई और रंग अब जमाएं कैसे 


शाइस्ता लोग भी अपना अदब भूल जाते है

वो जब हंसती है तो नज़र अपनी हटाये कैसे


तेरे घर के किनारे से गुज़रती है खिज़ा 

तू जहाँ रहती है वहाँ फूल मुरझाये कैसे


तू सो जाए तो रात की ज़ीनत निखरती है

तू जागती हो तो चांद सितारे नज़र आएं कैसे


कभी लगता है कि सच तो तुम हो नहीं सकती

पर तुम ख़्याल हो तो सबको नज़र आये कैसे


एक गली दूर का रिश्ता था एक गली दूर ही रहा

उलझन ये कि मैं वहां आऊं कैसे तू यहाँ आये कैसे

Sunday, September 6, 2026

Pareshani

हर आदमी जो परेशान है 

वो परेशान रहना भी चाहता है


वो डूब रहा है मझधार में पर

वो दरिया में बहना भी चाहता है 


मालूम है बात कहने से क्या होगा 

पर वो सुखन कहना भी चाहता है


अंगारे साफ नजर आ रहे हैं राहों में 

पर वो जलन सहना भी चाहता है

Thursday, August 27, 2026

Zamane se pehle

हमने रखा था तुमको ज़माने से पहले 

तुम भी सोच लेते आज़माने से पहले


बड़ी छटपटाहट में निकलते हैं दिन तेरे बिन

कोई इशारा कर दिया कर न आने के पहले 


चलो मैं भूल जाऊंगा तुमने क्या बोला था

एक बार सच बोल दो बहाने से पहले 


इसी गुमाँ ने कितनी जवानियाँ खराब कर दी

उसने आँख मिलायी तो थी आँख चुराने से पहले 


मेरा हश्र वही होगा जो हर परवाने का होता है 

अपनी सोच लो मुझको जलाने से पहले 


ये रूठने मनाने का खेल मुझे आता ही नहीं 

मैं तो मान जाता हूं तेरे मनाने से पहले 


ये तो अब है जो तुमको फ़ासिले चाहिए 

सोचना चाहिए था मुझमे समाने से पहले

Tuesday, August 25, 2026

Nishani

हम निशानी समझ के जो दे रहे थे

वो नादानी समझ के मिटा रहे थे


हटा के चश्मा नज़र से मेरी 

वो रंग अपने दिखा रहे थे 


वो पूछ रहे थे नाम हमारा 

हम उनको अपना बता रहे थे 


दफ़्न कर चुके थे वो एहसास सारे 

बस मरासिम को सूली चढ़ा रहे थे 


मैं उम्मीद पूरी कर रहा था उनकी 

वो वादा अपना निभा रहे थे


चिता पर भी वो खुली आंखों से लेटा 

कोई ख़्वाब उसको सता रहे थे

Saturday, August 22, 2026

Tareeqay

ख्वाब भी हमको सलीके से नहीं आते 

तरीके से देखता हूं पर तरीके से नहीं आते


घुसा है दिल में तसव्वुर नीमकश 

तीर भी आर-पार तरीके से नहीं आते


पुरानी तालीम है मेरी पुराने मेरे तौर

मुझे नए जमाने के तरीके से नहीं आते


मरासिम न हुए गणित के सवाल हो गये 

आते तो हैं समझ पर तरीके से नहीं आते


इश्क़ करूं या रश्क करूं उस सादगी से

बहाने बनाने भी उन्हें तरीके से नहीं आते 


मेरे पास आते ही उन्हें घड़ी से प्यार हो जाता है

आते तो हैं मिलने पर तरीके से नहीं आते

Kaise

 जिंदगी चढ़ा देती है जिसको अर्श पर 

वो टूटा हुआ तारा कैसे हो जाता है 


मैंने अपना लिये थे कुछ ग़म

ये ग़म इतना सारा कैसे हो जाता है 


पी के पानी मीठी नदियों का 

समंदर और भी खारा कैसे हो जाता है 


दे के आंसू, कर के रंजिश

सितमगर और भी प्यारा कैसे हो जाता है

Friday, August 21, 2026

Mat karna

मन में उबाल आये तो खुद से सवाल मत करना

उफन जाना, सुलग सुलग कर मलाल मत करना


तुम बादल हो, खुद तय करो कब करनी है बारिश

लोग तो यही कहेंगे कि फिलहाल मत करना


दोस्तों में भी उसे दुश्मन नज़र आने लगे 

किसी दुश्मन का भी ऐसा हाल मत करना


मैं गुनहगार हूं तुम्हारा, बेशक़ क़त्ल करो

मगर एक बार में करना, हलाल मत करना


बवाल वाइज़ों से होता है बावलों से नहीं

सिर्फ बवाल करने के लिए बवाल मत करना

Bayaan e ranaai

मुसलसल निगाहों से छलक रही है शराब  ये जहां होश में आये तो आए कैसे  वो कुछ कहते भी नहीं और सुनते भी नहीं उनके मतलब की बात उनको बताएं कैसे  उन...

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