Tuesday, August 25, 2026

Nishani

हम निशानी समझ के जो दे रहे थे

वो नादानी समझ के मिटा रहे थे


चिता पर भी वो खुली आंखों से लेटा 

कोई ख़्वाब उसको सता रहे थे


हटा के चश्मा नज़र से मेरी 

वो रंग अपने दिखा रहे थे 


वो पूछ रहे थे नाम हमारा 

हम उनको अपना बता रहे थे 


दफ़्न कर चुके थे वो एहसास सारे 

बस मरासिम को सूली चढ़ा रहे थे 


मैं उम्मीद पूरी कर रहा था उनकी 

वो वादा अपना निभा रहे थे

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Nishani

हम निशानी समझ के जो दे रहे थे वो नादानी समझ के मिटा रहे थे चिता पर भी वो खुली आंखों से लेटा  कोई ख़्वाब उसको सता रहे थे हटा के चश्मा नज़र से ...

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