Thursday, August 20, 2026

Bas tere liye

तूफानों से भी अच्छे रिश्ते बनाए रक्खे हैं

लौ के लिए हाथों से फानूस बनाए रक्खे हैं


बस ये मत समझना ये मेरे लिए आसान है 

तेरे फूलों के लिए कुछ काँटे अपनाये रक्खे हैँ 


हर सख्ती के पीछे एक बंधा हुआ इंसान है 

संगदिल नहीं हूं दिल पे पत्थर जमाये रक्खे हैं


रोज़ जाग रहा हूं चंद जुगनुओं के लिए 

मेंरे बिस्तर पे तेरे सपने सुलाए रक्खे हैं 


बहुत सताता है मुझे खामोशी का शोर 

तेरी शिकायतो में अपने शिक़वे भुलाये रक्खे हैं


मैं आगे खड़ा हूं कुछ तीर लेने के लिए 

अपने जूतों में मैंने छाले छिपाये रक्खे हैं


तुम्हारे ख़ाबो की मुझे भी है परवाह 

बस जेब में आज के निवाले बचाये रक्खे हैं

No comments:

Pareshani

हर आदमी जो परेशान है  वो परेशान रहना भी चाहता है वो डूब रहा है मझधार में पर वो दरिया में बहना भी चाहता है  मालूम है बात कहने से क्या होगा  प...

Other Popular Posts