Saturday, August 22, 2026

Kaise

 जिंदगी चढ़ा देती है जिसको अर्श पर 

वो टूटा हुआ तारा कैसे हो जाता है 


मैंने अपना लिये थे कुछ ग़म

ये ग़म इतना सारा कैसे हो जाता है 


पी के पानी मीठी नदियों का 

समंदर और भी खारा कैसे हो जाता है 


दे के आंसू, कर के रंजिश

सितमगर और भी प्यारा कैसे हो जाता है

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